फुटबॉल क्लब जेनिट, लेनिनग्राद में Stalin Metal Works 'स्टालिन धातु संयंत्र' के नाम से 1925 में स्थापित किया गया था।

क्लब 1940 तक "Stalinets" बुलाया जाता था| 1940 के बाद इसे इसका वर्तमान नाम "Zenit" इस्तेमाल होना चालु हुआ। WW2 के दौरान कई खिलाड़ियों को कज़ान भेज दिया गया था, कुछ स्वेच्छा से सेना में शामिल हो गए, कुछ युद्ध के शिकार हो गए, कुछ शहर में बने रहे और लेनिनग्राद की 900 दिन की लंबी घेराबंदी के शिकार हो गए। 1944 के वसंत में घेराबंदी के अंत के बाद, शेष खिलादी अपने घर लौट गए। 1963 में, "नीले-सफेद-नीले आकाश" सोवियत खिताब जीतने जीतते जीतते रह गए। Vasiliy Daniloc, एक पूर्व खिलाड़ी, सोवियत संघ की टीम का हिस्सा थे, जो विश्व कप 1966 में तीसरा स्थान हासिल किये थे|

1940-1950

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ज़ेनिट के इतिहास में महत्वपूर्ण परिवर्तन आया। युद्ध के दौरान क्लब राज्य ऑप्टिकल मैकेनिक संयंत्र (LOMO बाद में) के प्रबंधन के तहत आया| कई खिलाडी और कोच कज़ान भेज दिए गए और बाकी लेनिनग्राद में रुके और शहर के नाकाबंदी के दौरान आयोजित मैचों में खेले।कई खिलाडी लड़ने के लीये भी चले गए थे। भाइ एवगेनी और वैलेन्टिन शेलागीं, निकोले सलॉस्टिन, सैमुएल कोजिनेटस, निकोले लिपिक, अर्कादि लारिओनोव, बोरिस इविन और लियोनिद डोरोफेयेव नाकाबंदी के दौरान मारे गए।

जेनिट 1944 के वसंत में लेनिनग्राद के अपने घर शहर में लौट आए, जिसके बाद यह सनसनीखेज सोवियत संघ कप जीते। जेनिट ने फाइनल के रस्ते पर डायनमो मास्को और स्पार्टक मास्को को हराया था।फाइनल में "लिएउटनन्टस टीम" (TsDKA) को हराया था। इस टीम का हिस्सा थे लियोनिद इवानोव, निकोले कोप्स, इवान कुरिन्कोव (कप्तान), एलेक्सी प्शेनिकन्य, विक्टर बोड्रोव, एलेक्सी याब्लोच्किन, एलेक्सी लारिओनोव, बोरिस लेविन-कोगन, निकोले स्मिर्नोव, बोरिस चुचेलाव और सेर्गेई सैनिकोव। टीम कोंस्तांतिन लेमेशेव द्वारा कोच की गई थी|

दुर्भाग्य से, जेनिट नहीं कर सका इस सफलता पर निर्माण। साल दर साल टीम परिणाम खराब होते गए, और 1948 में टीम को तोड़ने की चर्चा हुई। 1958 में, मास्को के जॉर्जी इवानोविच ज़हरकोव, लेनिनग्राद के बाहर के पहले क्लब कोच बने। ज़हरकोव ने लेनिनग्रेड के स्कूलों से खिलाड़ियों की विकास पर जोर दिया। हालांकि टीम में लेनिनग्राद के कई मूल निवासी - स्टानिस्लाव ज़ड़िदोनोव, अनातोली देर्गचेव, वादिम खरपोविटस्की, लेव बुरछालकिन, निकोले र्यजनोव और ओलेग मोरोज़ोव थे, यह टीम 4th पद के ऊपर नहीं पोहोंच पाए|

हमारी टीम यूईएफए कप में पहली बार 1981 में खेले थी और 21 नवम्बर 1983 में Metalist Kharkiv को 4-1 से हराके अपनी पहली चैंपियनशिप हासिल करि थी।

1990 का दशक डिवीजन 1 (विभाजन 2) जेनिट लिए एक मुश्किल समय थे। 1999 में रुसी कप जीतने के बाद एक सुधार देखा गया। प्रसिद्ध कोच यूरी मोरोज़ोव, के नेत्रतित्व में जनित ने 2001 में चैंपियनशिप में तीसरा स्थान हासिल किया थे|

चेक कोच पेटर्ज़ल ने मोरोज़ोव की जगह ली और उन्होंने टीम को पिच पर आवश्यक आजादी दे दी। 2003 में जेनिट रूस चैम्पियनशिप में दूसरे नंबर पर था।टीम को और बेहतर बनाने के लीये 2006 में कुशल कोच डिक एडवोकेट में को लाया गया, जिनके नेतृत्व में ज़ेनिट पहली बार रुसी चैंपियन बने|

2008 में एडवोकेट के नेतृत्व में जनित ने विल्लाररेअल, ओलंपिक मार्सिले, बायर लेवरकुसेन, बेयर्न म्यूनिख और फाइनल ग्लासगो में रेंजर्स में हराकर पहला यूएफा खिताब हासिल किया।

29 अगस्त 2008 में मैनचेस्टर यूनाइटेड, पूर्व चैंपियंस लीग विजेता को हराकर ज़ेनिट ने पहले UEFA सुपर कप का खिताब हासिल किया|

दिसंबर 2009 में इतालवी कोच लुसियानो स्पालेटी के आने के बाद टीम और बेहतर खेली । 2010 की गर्मियों में दूसरा कप खिताब फिर, नवंबर 2010 में दूसरा चैम्पियनशिप खिताब मनाया गया|

जेनिट की जीत का सिलसिला अगले वर्ष जारी रहा। 2011 के शुरू में CSKA Moscow (सीएसकेए मास्को) को सुपर कप में हराकर एक साल में 3 ट्राफियां जीतके ऐतिहासिक तिगुना हासिल किया। अगले साल फिर से सीएसकेए मॉस्को को हरके खिताब जीता गया|